हनुमान जी के परम भक्त और बीसवीं सदी के महान संत श्री नीम करौली बाबा (कैंची धाम वाले बाबा) का जीवन चरित्र अद्भुत आस्था, निःस्वार्थ सेवा और अलौकिक चमत्कारों की एक अनूठी गाथा है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर संपूर्ण विश्व में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय में बसने वाले बाबा नीम करौली महाराज की महिमा आज भी उतनी ही जीवंत है।
1. प्रारंभिक जीवन और बाल्यकाल
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जन्म: नीम करौली बाबा का जन्म सन 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के आगरा (वर्तमान फिरोजाबाद) के पास अकबरपुर गांव में एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
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मूल नाम: उनका बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। उनके पिता का नाम दुर्गादास शर्मा तथा माता का नाम कौशल्या देवी था।
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माता का साया और विवाह: मात्र 8 वर्ष की अल्पायु में उनकी माता का देहांत हो गया। इसके बाद 11 वर्ष की आयु में उनका विवाह रामबेटी नाम की कन्या से हुआ।
2. गृहत्याग और साधना का मार्ग
विवाह के कुछ समय बाद, मात्र 13 वर्ष की आयु में ही बाबा लक्ष्मी नारायण शर्मा ने गृहत्याग कर दिया और जन-कल्याण एवं साधना के मार्ग पर निकल पड़े। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में कठिन तपस्या की।
साधना के दौर में उन्हें विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना गया:
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लक्ष्मण दास: गुजरात के राजकोट मंदिर में सेवा और ध्यान साधना के दौरान।
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तलैया बाबा: गुजरात के बावनिया गांव में घंटों जल के भीतर जल-समाधि में साधना करने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें 'तलैया बाबा' नाम दिया।
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महेंद्र बाबा: साधु जीवन के विभिन्न पड़ावों पर।
3. नीम करौली नाम और प्रथम श्रेणी ट्रेन का अलौकिक चमत्कार
बाबा के 'नीम करौली' नाम पड़ने के पीछे एक अत्यंत प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना जुड़ी है:
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जब बाबा ट्रेन के प्रथम श्रेणी डिब्बे में यात्रा कर रहे थे, तो टीसी (टिकट चेकर) ने बिना टिकट देखकर उन्हें नीम करौली (Neem Karoli) नामक गांव के स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतार दिया।
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बाबा शांत भाव से अपने चिमटे को जमीन में गाड़कर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। इसके बाद ट्रेन चालकों ने गाड़ी चलाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी।
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जब ट्रेन कर्मचारियों और यात्रियों को बाबा की सिद्धियों का अहसास हुआ, तो उन्होंने बाबा से क्षमा मांगी और उनसे पुनः ट्रेन में बैठने का निवेदन किया।
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बाबा ने दो शर्तों पर सहमति जताई: पहला, नीम करौली गांव में रेलवे स्टेशन बनाया जाए और दूसरा, साधु-संतों का आदर किया जाए। बाबा के ट्रेन में बैठते ही ट्रेन तुरंत चल पड़ी। इसके बाद से ही वे नीम करौली बाबा के नाम से विख्यात हुए।
4. जीवन के प्रमुख अलौकिक चमत्कार
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गुफा और नागों का दृश्य:
नीम करौली गांव में साधना के दौरान जब एक शिष्य बाबा के लिए दूध लेकर गुफा के अंदर गया, तो उसने देखा कि बाबा के पूरे शरीर पर विषैले सर्प लिपटे हुए हैं। शिष्य दृश्य देखकर मूर्छित हो गया, जिसे बाद में बाबा ने जल छिड़ककर होश में लाया।
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खारे पानी को मीठा करना:
करौली धाम में जब पेयजल संकट के समाधान हेतु एक कुआं खोदा गया, तो उसका पानी खारा निकला। बाबा ने कुएं में चुटकी भर चीनी डालने को कहा और चमत्कारिक रूप से आज भी उस कुएं का पानी मीठा है।
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जल का देसी घी में बदलना:
कैंची धाम में एक विशाल भंडारे के दौरान अचानक देसी घी समाप्त हो गया। बाबा ने पास बहती नदी से पानी लाने को कहा। कड़ाहियों में पानी डालते ही वह शुद्ध देसी घी में बदल गया और भंडारा सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
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अग्नि से रक्षा:
मंदिर निर्माण में ईंट दान करने का वादा करके मुकरने वाले एक व्यापारी की दुकान में भीषण आग लग गई। जब व्यापारी ने रोते हुए बाबा से क्षमा मांगी, तो बाबा ने उसे शांत कराया। वापस लौटने पर पाया गया कि आग से उसकी दुकान का कोई नुकसान नहीं हुआ था।
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पूर्व भविष्यवाणी:
बाबा ने देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में चौधरी चरण सिंह के आगमन पर उन्हें प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया था, जो बाद में सच साबित हुआ।
5. पारिवारिक पुनर्मिलन और कैंची धाम की स्थापना
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लगभग 10-12 वर्षों के संन्यास जीवन के बाद, पिता दुर्गादास जी ने उन्हें खोज निकाला। पिता की आज्ञा का मान रखते हुए बाबा पुनः घर लौटे, कुछ वर्ष गृहस्थ धर्म का पालन किया और सन 1925 में उन्हें पुत्र रत्न (अनेक सिंह) की प्राप्ति हुई।
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इसके बाद बाबा ने पुनः लोक-कल्याण के लिए भारत भ्रमण शुरू किया।
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सन 1961 में बाबा उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित 'कैंची' पहुंचे और 15 जून 1964 को विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम (Kainchi Dham) आश्रम की स्थापना की। आज हर साल 15 जून को कैंची धाम में विशाल मेले और भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। Apple के संस्थापक स्टीव जॉब्स, Facebook के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और क्रिकेटर विराट कोहली जैसी दिग्गज हस्तियां भी यहां आशीर्वाद प्राप्त कर चुकी हैं।
6. महासमाधि
11 सितंबर 1973 को उत्तर प्रदेश के वृंदावन धाम में बाबा नीम करौली महाराज ने अपनी देह का त्याग कर महासमाधि ली। वृंदावन आश्रम में स्थित उनकी समाधि आज भी करोड़ों भक्तों के लिए असीम शांति, आस्था और दिव्य ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है।
जय नीम करौली बाबा! जय हनुमान जी Maharaj!
