🚩 हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के गंगथ (इंदौरा) में एक ऐसा ऐतिहासिक और अलौकिक सफेद शिवलिंग विराजमान है, जिसके दर्शन मात्र से जन्मों के पाप कट जाते हैं। माना जाता है कि पूरे भारत वर्ष में अपनी तरह का यह अकेला सफेद शिवलिंग है, जिसकी महिमा बाबा अमरनाथ के समान मानी गई है।

शाही किला और मुगल आक्रमण (1641 ईस्वी): नूरपुर के राजा जगत सिंह भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपने माओगढ़ किले में इस शिवलिंग की स्थापना की थी। जब मुगलों ने किले पर आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया, तो यह शिवलिंग मलबे के नीचे दब गया।

स्वप्न और दूध की धारा का चमत्कार: कालखंड बीतने के बाद, इंदपुर के बाबा मग्गो को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर अपने स्थान का पता बताया। जब ग्रामीणों ने खोदाई शुरू की, तो एक फावड़ा शिवलिंग से टकरा गया, जिससे तुरंत दूध की धारा बह निकली। उस टकराने का निशान आज भी शिवलिंग पर दिखाई देता है।

पालकी की कथा: जब ग्रामीण इस शिवलिंग को पालकी में विराजमान कर ले जा रहे थे, तो गंगथ बाजार के पास विश्राम के लिए रुके। इसके बाद पालकी टस से मस न हुई। शिव की यही इच्छा मानकर इसे गंगथ के बीचों-बीच स्थापित कर दिया गया।

छोंछ खड्ड और चमत्कारिक वर्षा की गाथा
क्षेत्र की एक प्रसिद्ध लोककथा के अनुसार, जब एक समय पूरे इलाके में भीषण सूखा पड़ा था, तो सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर पास की 'छोंछ खड्ड' से जल लाकर शिवलिंग का सामूहिक जलाभिषेक किया था। जलाभिषेक पूरा होते ही आसमान में घनघोर बादल छा गए और ऐसी मूसलाधार बारिश हुई जिसने पूरे क्षेत्र को सूखे के संकट से उबार लिया।