क्या है पूरा मामला ?
अवैध वसूली: मरीजों से पार्किंग के नाम पर 50 रुपए या उससे अधिक वसूले जा रहे थे, जिसे कभी कोई कानूनी मंजूरी मिली ही नहीं थी।
कागजी खेल: 14 सितंबर 2021 को रोगी कल्याण समिति की बैठक में रेट बढ़ाने का महज एक प्रस्ताव रखा गया था, जिसे कभी पास नहीं किया गया। इसके बावजूद 1 जून 2022 से इसी अमान्य प्रस्ताव के आधार पर जनता को लूटा जा रहा था।
बदसलूकी और लापरवाही: 10 जून 2026 को अभिषेक शर्मा से दो घंटे से कम समय के लिए 50 रुपए वसूले गए। सवाल उठाने पर कर्मचारियों ने बदसलूकी की और पर्ची पर समय तक दर्ज नहीं किया।
अब क्या बदला? (नई व्यवस्था)
अभिषेक शर्मा की कानूनी लड़ाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। 14 सितंबर 2026 से टांडा अस्पताल में निम्नलिखित नियम लागू होंगे:
चौपहिया वाहन (4 घंटे तक) - केवल 10 रुपए
दोपहिया वाहन (4 घंटे तक) - केवल 5 रुपए
रक्तदान करने वाले, एंबुलेंस, लंगर सेवा वाहन - पूरी तरह मुफ्त
कड़े निर्देश: भविष्य में केवल इलेक्ट्रॉनिक मशीन से ही पार्किंग पर्ची काटी जाएगी। यह फैसला प्रदेशभर के उन संस्थानों के लिए कड़ा संदेश है जो जनता की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
आयोग ने मामले में टांडा के चिकित्सा अधीक्षक और प्रिंसिपल को 20 लाख रुपये जिला रेडक्रॉस सोसायटी कांगड़ा में जमा कराने के आदेश दिए हैं। इस राशि का इस्तेमाल यातायात नियमों के पालन, मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों में यातायात जागरूकता बढ़ाने और हेलमेट वितरण जैसे कार्यों के लिए किया जाएगा।
पार्किंग ठेकेदार को भी आयोग ने राहत नहीं दी है। उसे दो लाख रुपये पुलिस अधीक्षक कांगड़ा के पास जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा सभी विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये जिला उपभोक्ता विधिक सहायता कोष में जमा कराने होंगे।
मामले में शिकायतकर्ता को भी आर्थिक राहत दी गई है। आयोग ने उसे 5 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराने पर संबंधित पक्षों को 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
Frequently Asked Questions
टांडा मेडिकल कॉलेज पार्किंग मामले में उपभोक्ता अदालत ने क्या बड़ा फैसला सुनाया है?
कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने टांडा मेडिकल कॉलेज (Tanda Medical College) के पार्किंग स्थल पर ओवरचार्जिंग के आरोप में कॉलेज के प्रिंसिपल और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट पर 20 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। अदालत ने इसे सेवा में बड़ी कमी और मरीजों के साथ शोषण माना है।
प्रिंसिपल और एमएस पर लगाए गए ₹20 लाख के जुर्माने का उपयोग कैसे होगा?
अदालत ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की 20 लाख रुपये की राशि जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, कांगड़ा में जमा की जाएगी। इस धनराशि का उपयोग विशेष रूप से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।
पार्किंग ठेकेदार विवेक डोगरा के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है?
अदालत ने पार्किंग ठेकेदार विवेक डोगरा पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास जमा होगी, जिसका उपयोग जिले में सड़क सुरक्षा जागरूकता और हेलमेट वितरण कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा।
शिकायतकर्ता अभिषेक शर्मा को अदालत की ओर से क्या राहत मिली है?
ज्वालामुखी निवासी शिकायतकर्ता अभिषेक शर्मा पाधा को मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। यह राशि विपक्षी दलों द्वारा संयुक्त रूप से दी जाएगी।
अदालत ने अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर क्या अन्य निर्देश दिए हैं?
उपभोक्ता आयोग ने अस्पताल परिसर के भीतर सड़क के किनारे ठेकेदार द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स और रस्सियों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। साथ ही प्रिंसिपल, एमएस और स्वास्थ्य सचिव को जिला उपभोक्ता कानूनी सहायता कोष में 25,000-25,000 रुपये जमा करने का भी निर्देश दिया है।
