हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में स्टाफ नर्सों की भारी कमी और राज्य सरकार द्वारा लाई गई नई भर्ती नीति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने बाल कृष्ण बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई करते हुए अपने पिछले आदेशों में फेरबदल से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सरकार से अगली सुनवाई तक नया शपथपत्र दायर करने के आदेश भी दिए। मामले पर सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा (असिस्टेंट स्टाफ नर्स) के रूप में 312 पदों पर की जाने वाली नियुक्तियों पर लगी अंतरिम रोक को आगे भी जारी रखने के आदेश दिए हैं।
अदालत की कार्यवाही के दौरान यह बात सामने आई कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्सों के 1535 नियमित पद खाली पड़े हैं। इन खाली पदों को नियमित रूप से भरने के बजाय राज्य सरकार ने छह नवंबर, 2025 को एक नई नीति को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई। इसके तहत मेडिकल कालेजों में असिस्टेंट स्टाफ नर्स का एक नया कैडर बनाने का फैसला किया गया। इस पॉलिसी के तहत चयनित नर्सों को पांच साल के लिए नियुक्त किया जाना था। नीति की सबसे विवादित शर्त यह है कि इन पांच सालों की सेवा के बाद भी उन्हें नियमितीकरण का कोई अधिकार नहीं होगा और उन्हें सरकारी कर्मचारी भी नहीं माना जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने सरकार की इस नीति का विरोध किया है।